शनिवार, 28 मार्च 2026
रात के दावे सबके सब झूठे निकले
तुम मुझको बचपन-सी प्यारी लगती हो
तुम तो मुझको राजकुमारी लगती हो
मैं तो झुलसा जंगल दावानल में
तुम बिलकुल फूलों की क्यारी लगती हो
मन तो मेरा है कि राधा बन जाऊँ
तुम तो मुझको रास - बिहारी लगती हो
इस दुनिया से हारा तो क्या हारा मैं?
तुम तो हमको जीत हमारी लगती हो
कहा किसी राजा ने गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त
पर तुम तो हमको जन्नत सारी लगती हो
पता नहीं किसने औरत को अबला लिखा
तुम तो सौ मर्दों पर भारी लगती हो
क्रॉप टॉप के लटके झटके फीके है
तुम जो साड़ी में इंडियन नारी लगती हो
रात के दावे सबके सब झूठे निकले
मैंने देखा चाँद से प्यारी लगती हो
गुरुवार, 26 मार्च 2026
एक बच्चे की याचना
गज़ा की उजड़ी धरती से
एक मासूम ने सीखी...
थोड़ी - अंग्रेजी...
और...
कहा तुतलाती आवाज़ में...
"Please No War"
उसके इन तीन शब्दों में था...
दर्द...युद्ध का...
माँ - बाप को खोने का...
दोस्तों से बिछड़ने का!
पर मासूम बच्चा...
जानता कहाँ था...
जिन सत्ताधिशों के लिए...
उसने अंग्रेजी सीखी...
उनके अंदर का बच्चा तो...
मर चुका है कब का !
मंगलवार, 3 मार्च 2026
ब्लड - मून
जैसे ही सूरज - चाँद के बीच
'पृथ्वी' आ गई...
चाँदनी 'सुर्ख-लाल' रंग में
नहा गई...
लोगों ने कहा देखो,
'मून-ब्लड' हो गया....
लगा 'ग्रहण' और
"चाँद" सो गया...
चाँद ने कहा,
'धरती' के बाशिंदों से...
मैं तुम्हारी 'पृथ्वी' का
"आईना" हो गया...
ये 'सुर्ख लाल रंग'
कहाँ मेरा है?
तुमने ही धरती पर
'लाल रंग' खेला है...
और... कहते हो मैं
"ब्लड-मून" हो गया...
ये "ग्रहण" मुझपर नहीं...
तुमपर लगा है?
तुम्हारा "मानवतावादी"
चेहरा खो गया...
मैं तो बस पृथ्वी का
"आईना" हो गया 🌞🌎🌘
- अमित अरुण
सोमवार, 2 मार्च 2026
युद्ध
युद्ध लड़ते है दो देश?
या दो देशों के 'कुछ' लोगों का 'अहंकार'!
हाहाकार, चीख - पुकार, अत्याचार....
मरते नहीं केवल सैनिक...
पर मासूम... और... प्यार....
और....
कुछ लोग चटखारे ले लेकर देखते है....
युद्ध का लाइव टेलीकास्ट...
उन्हें 'करूण' नहीं, 'रोमांचित' करता है बम-ब्लास्ट....
और.... इंसान ही इंसान की मौत पर....
करता है अट्टाहास....
बस....
यही है 'इंसान' के 'दानव' बनने की शुरुआत?
शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025
मातृभूमि
अगर मैं कह दूँ अपनी "मातृभूमि" को
कुछ ऐसा - वैसा....
खींच जाएगी तलवारें...
और... कहलाऊंगा मैं "देशद्रोही"...
कहेंगे मेरे बारे में लोग...
कैसा - कैसा???
पर बहुत सोच समझकर...
कहता हूँ....
'देश नहीं सुरक्षित "बच्चियो" के लिए....'
हर जगह गिद्ध है...
तैयार नोंचने के लिए...
और पूरी सत्ता का तंत्र है...
मासूमों को दबोचने के लिए...
न्यायलय न्याय दे रहें "अन्याय" से...
क्या हो रहा ये दो नंबर की "आय" से...
"आसाराम" से लेकर "राम - रहीम"...
बिलकिस के दोषियों से लेकर...
कुलदीप सेंगर "महामहिम"....
सबके चरणों में जज साहब लेटे है....
शायद जजों के "बेटियाँ" नहीं सब "बेटे" है...
CM / PM सब "खामोश" अन्याय पर...
या इनकी ही "मौन-मुहर" लगी इस "न्याय' पर??
💔सत्य घटना💔
- अमित अरुण
बुधवार, 24 दिसंबर 2025
माँ का प्यार
इस दुनिया में सबसे संकुचित होता है "माँ " का प्यार...
एकदम सीमित...
खुद के बच्चों तक सिमटा...
बच्चों को करता विस्मित...
ऐसी ही एक "माँ" आई थी "देवी माँ " के पास...
अपने नवजात शिशु को शीश नवाने...
"नवजात शिशु " कोमल.... अबोध.... मासूम...
सबके ऐसे ही होते है...
चाहे मानव हो या बेजुबान....
उसी मंदिर के आँगन में...
खेल रहा था नन्हा बच्चा "कुत्ते" का...
कार का लगा रिवर्स गियर...
और एक ही पल में सबकुछ ख़त्म....
बदहवास "बच्चे" की "माँ " कुछ समझ न पाई...
"चाट" रही थी बच्चे को...
सोच रही थी अभी तो खेल रहा था...
"चुप" क्यों है...
"उठा" रही थी...
"जगा" रही थी...
"मना" रही थी...
"जता" रही थी...
"निःशब्द" प्यार...
पर "कार" में बैठी "माँ" को कोई "अफ़सोस" न था....
कोई "शोक" न था...
उसकी गोद में उसका बच्चा था महफूज़ बड़ा...
दूसरी "माँ" का था सड़क पर "बेजान" पड़ा...
"ईश्वर" था मंदिर में खामोश खड़ा...
आस-पास के लोगों में से कोई न लड़ा...
सारी "माँओ" का प्यार है "सिमित"....
अपने-अपने बच्चों तक...
पता नहीं कब बात ये पहुँचे...
अकल के कच्चों तक...
"ईश्वर" मूरत में नहीं....
"भावनाओं" में है....
"प्रेम" आस्था में नहीं...
"संवेदनाओं" में है. 🐕😭🐕
रविवार, 14 दिसंबर 2025
बाबा दिल के पास ❤️
बाबा दिल के पास हैं जितने, दूजा ना कोई,
बाबा से ही जागी है, जो थी किस्मत सोई।
=========================
खाटू वाले बाबा, तेरी अलख जगाई है,
दुनिया छोड़ी सारी, तुमसे प्रीत रचाई है।
नतमस्तक होकर खुद को चरणों में डाला है,
बस हमने भक्ति की ये ही रीत निभाई है।
अब तो हमारी हस्ती बाबा, तुममें है खोई,
बाबा दिल के पास हैं जितने, दूजा ना कोई।
=========================
दुःख सारे जीवन के हर लो, बाबा श्याम हमारे,
इस जग के हारे के बाबा, अब हो तुम ही सहारे।
राह तुम्हारी तकता हूँ, बस एक झलक दिखला दो,
कुछ तो अपने होने के हमको भी दे दो इशारे।
सिर्फ तुम्हारी आस में बाबा, आँखें हैं रोई,
बाबा दिल के पास हैं जितने, दूजा ना कोई।
=========================
महाबली, महादानी बाबा श्याम हमारे हैं,
दे हारे का साथ — ये बाबा कितने प्यारे हैं।
डूब के इनकी भक्ति में भवसागर पार करो,
जितने ये है हमारे, उतने ही ये तुम्हारे हैं।
बाबा की भक्ति में हमने रूह ये भिगोई,
बाबा दिल के पास हैं जितने, दूजा ना कोई।
=========================
जाति–भेद न माने बाबा, तीन–बाण–धारी,
नीला घोड़ा — टक–टक–टक–टक — शान की सवारी।
कलयुग के पापों का अब तो करने हिसाब सारा,
बाबा बनकर आए हैं,खुद बाँके–बिहारी।
हमने भी अब श्याम–नाम की धुन है पिरोई,
बाबा दिल के पास हैं जितने, दूजा ना कोई।
=========================
बाबा के बाणों से तीनों लोक में हलचल है,
दुश्मन क्या कर लेगा, जब संग बाबा हरपल है।
अरे! आओ ज़माने वालों, मुझ पर कर लो ज़ुल्म–ओ–सितम,
मुझको क्या डर, जब बाबा ही मेरा संबल है।
बाबा श्याम की हस्ती हमने अंतर्मन में संजोई,
बाबा दिल के पास हैं जितने, दूजा ना कोई।
बाबा से ही जागी है जो थी किस्मत सोई,
हमने भी अब श्याम–नाम की धुन है पिरोई,
बाबा दिल के पास हैं जितने, दूजा ना कोई....
=========================
बोलो...
*युद्ध साक्षी, दुर्गा उपासक, खाटू नरेश, तीन बाण धारी, हारे के सहारे, कलयुग प्रणेता, कृष्णावतार, श्याम रूप, महादानी, महाबली,मोरवी-घटोत्कच पुत्र, बाबा बार्बरीक की जय* 🙏🙏🙏 *ll जय श्री श्याम ll* ❤️
- *भजन रचियता : अमित अरुण साहू*




