तेरी याद क्यों आई मुझको,
कम है क्या तन्हाई मुझको।
औरों से तो डर नहीं लगता,
भारी है परछाई मुझको।
शादी उसकी पक्की हो गई,
कल ही वो बतलाई मुझको।
तू कहीं मर मत जाना बेटा,
अम्मा कल समझाई मुझको।
बिस्मिल्लाह के दीवाने थे,
पर भारी शहनाई मुझको।
कितना टूट के प्यार किया था,
मिली भी क्या रुसवाई मुझको।
सतही दुनिया,ऊब गया मैं,
मारेगी गहराई मुझको।
क्यों लगते हैं गहरे दोस्त,
चाकू और कलाई मुझको।
कैद से अब उड़ जाए पंछी,
अल्लाह, दे दो रिहाई मुझको।
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