बड़े मत होना...
बहुत झंझट है...
बड़े होने में...
दुःख भी है...
सबसे बड़ा दुःख है...
अपने उसूलों से कर लेना समझौता...
चंद सिक्कों के लिए...
पर बड़े तो वो भी होते होंगे...
जिनके उसूल नहीं होते...
मैं नहीं चाहता था बड़ा होना...
क्योंकि...
मैं सच्चा रहना चाहता था...
जो जितना बड़ा वो...
उतना झूठा...
जो जितना बना...
वो उतना टूटा...
मैं टूटना नहीं चाहता था...
बेईमानी के बोझ से...
अच्छा होता बिखर जाता...
किरणों की तरह...
कहीं तो पहुँचता...
पर अब तो कहीं नहीं !
मैं बच्चा ही रहना चाहता था...
पर रह न पाया...
क्योंकि...
बच्चा बनें रहने के लिए...
"बाप" का होना ज़रूरी है !
बड़ा हो जाना मेरी...
मज़बूरी है!!!
मंगलवार, 29 सितंबर 2026
बाप....
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