लम्हों में सदियाँ .......
शनिवार, 28 मार्च 2026
तेरी क़ब्र को अब मैं ,कच्चा ही रखूँगा
एक जरा सी बात पर,रोना आ गया
मुझको याद,साथ तेरा,होना आ गया
जाता न था कोई उस वीरान हिस्से में
काम घर का आज वो,कोना आ गया
इश्क़ सचमुच तार देता है जीते-जी
जो था हासिल,उसको भी खोना आ गया
तू नहीं,पर तुझसे ही बातें करता हूँ
मुझको भी अब देख,जादू-टोना,आ गया
बिन तेरे मुझको आती ही नहीं थी
अब गम के बिस्तर पर,सोना आ गया
तेरी क़ब्र को अब मैं ,कच्चा ही रखूँगा
फूल खिलाने आ गए,दुःख बोना आ गया
रात के दावे सबके सब झूठे निकले
तुम मुझको बचपन-सी प्यारी लगती हो
तुम तो मुझको राजकुमारी लगती हो
मैं तो झुलसा जंगल दावानल में
तुम बिलकुल फूलों की क्यारी लगती हो
मन तो मेरा है कि राधा बन जाऊँ
तुम तो मुझको रास - बिहारी लगती हो
इस दुनिया से हारा तो क्या हारा मैं?
तुम तो हमको जीत हमारी लगती हो
कहा किसी राजा ने गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त
पर तुम तो हमको जन्नत सारी लगती हो
पता नहीं किसने औरत को अबला लिखा
तुम तो सौ मर्दों पर भारी लगती हो
क्रॉप टॉप के लटके झटके फीके है
तुम जो साड़ी में इंडियन नारी लगती हो
रात के दावे सबके सब झूठे निकले
मैंने देखा चाँद से प्यारी लगती हो
गुरुवार, 26 मार्च 2026
एक बच्चे की याचना
गज़ा की उजड़ी धरती से
एक मासूम ने सीखी...
थोड़ी - अंग्रेजी...
और...
कहा तुतलाती आवाज़ में...
"Please No War"
उसके इन तीन शब्दों में था...
दर्द...युद्ध का...
माँ - बाप को खोने का...
दोस्तों से बिछड़ने का!
पर मासूम बच्चा...
जानता कहाँ था...
जिन सत्ताधिशों के लिए...
उसने अंग्रेजी सीखी...
उनके अंदर का बच्चा तो...
मर चुका है कब का !
मंगलवार, 3 मार्च 2026
ब्लड - मून
जैसे ही सूरज - चाँद के बीच
'पृथ्वी' आ गई...
चाँदनी 'सुर्ख-लाल' रंग में
नहा गई...
लोगों ने कहा देखो,
'मून-ब्लड' हो गया....
लगा 'ग्रहण' और
"चाँद" सो गया...
चाँद ने कहा,
'धरती' के बाशिंदों से...
मैं तुम्हारी 'पृथ्वी' का
"आईना" हो गया...
ये 'सुर्ख लाल रंग'
कहाँ मेरा है?
तुमने ही धरती पर
'लाल रंग' खेला है...
और... कहते हो मैं
"ब्लड-मून" हो गया...
ये "ग्रहण" मुझपर नहीं...
तुमपर लगा है?
तुम्हारा "मानवतावादी"
चेहरा खो गया...
मैं तो बस पृथ्वी का
"आईना" हो गया 🌞🌎🌘
- अमित अरुण
सोमवार, 2 मार्च 2026
युद्ध
युद्ध लड़ते है दो देश?
या दो देशों के 'कुछ' लोगों का 'अहंकार'!
हाहाकार, चीख - पुकार, अत्याचार....
मरते नहीं केवल सैनिक...
पर मासूम... और... प्यार....
और....
कुछ लोग चटखारे ले लेकर देखते है....
युद्ध का लाइव टेलीकास्ट...
उन्हें 'करूण' नहीं, 'रोमांचित' करता है बम-ब्लास्ट....
और.... इंसान ही इंसान की मौत पर....
करता है अट्टाहास....
बस....
यही है 'इंसान' के 'दानव' बनने की शुरुआत?
शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025
मातृभूमि
अगर मैं कह दूँ अपनी "मातृभूमि" को
कुछ ऐसा - वैसा....
खींच जाएगी तलवारें...
और... कहलाऊंगा मैं "देशद्रोही"...
कहेंगे मेरे बारे में लोग...
कैसा - कैसा???
पर बहुत सोच समझकर...
कहता हूँ....
'देश नहीं सुरक्षित "बच्चियो" के लिए....'
हर जगह गिद्ध है...
तैयार नोंचने के लिए...
और पूरी सत्ता का तंत्र है...
मासूमों को दबोचने के लिए...
न्यायलय न्याय दे रहें "अन्याय" से...
क्या हो रहा ये दो नंबर की "आय" से...
"आसाराम" से लेकर "राम - रहीम"...
बिलकिस के दोषियों से लेकर...
कुलदीप सेंगर "महामहिम"....
सबके चरणों में जज साहब लेटे है....
शायद जजों के "बेटियाँ" नहीं सब "बेटे" है...
CM / PM सब "खामोश" अन्याय पर...
या इनकी ही "मौन-मुहर" लगी इस "न्याय' पर??
💔सत्य घटना💔
- अमित अरुण
बुधवार, 24 दिसंबर 2025
माँ का प्यार
इस दुनिया में सबसे संकुचित होता है "माँ " का प्यार...
एकदम सीमित...
खुद के बच्चों तक सिमटा...
बच्चों को करता विस्मित...
ऐसी ही एक "माँ" आई थी "देवी माँ " के पास...
अपने नवजात शिशु को शीश नवाने...
"नवजात शिशु " कोमल.... अबोध.... मासूम...
सबके ऐसे ही होते है...
चाहे मानव हो या बेजुबान....
उसी मंदिर के आँगन में...
खेल रहा था नन्हा बच्चा "कुत्ते" का...
कार का लगा रिवर्स गियर...
और एक ही पल में सबकुछ ख़त्म....
बदहवास "बच्चे" की "माँ " कुछ समझ न पाई...
"चाट" रही थी बच्चे को...
सोच रही थी अभी तो खेल रहा था...
"चुप" क्यों है...
"उठा" रही थी...
"जगा" रही थी...
"मना" रही थी...
"जता" रही थी...
"निःशब्द" प्यार...
पर "कार" में बैठी "माँ" को कोई "अफ़सोस" न था....
कोई "शोक" न था...
उसकी गोद में उसका बच्चा था महफूज़ बड़ा...
दूसरी "माँ" का था सड़क पर "बेजान" पड़ा...
"ईश्वर" था मंदिर में खामोश खड़ा...
आस-पास के लोगों में से कोई न लड़ा...
सारी "माँओ" का प्यार है "सिमित"....
अपने-अपने बच्चों तक...
पता नहीं कब बात ये पहुँचे...
अकल के कच्चों तक...
"ईश्वर" मूरत में नहीं....
"भावनाओं" में है....
"प्रेम" आस्था में नहीं...
"संवेदनाओं" में है. 🐕😭🐕




