जैसे ही सूरज - चाँद के बीच
'पृथ्वी' आ गई...
चाँदनी 'सुर्ख-लाल' रंग में
नहा गई...
लोगों ने कहा देखो,
'मून-ब्लड' हो गया....
लगा 'ग्रहण' और
"चाँद" सो गया...
चाँद ने कहा,
'धरती' के बाशिंदों से...
मैं तुम्हारी 'पृथ्वी' का
"आईना" हो गया...
ये 'सुर्ख लाल रंग'
कहाँ मेरा है?
तुमने ही धरती पर
'लाल रंग' खेला है...
और... कहते हो मैं
"ब्लड-मून" हो गया...
ये "ग्रहण" मुझपर नहीं...
तुमपर लगा है?
तुम्हारा "मानवतावादी"
चेहरा खो गया...
मैं तो बस पृथ्वी का
"आईना" हो गया 🌞🌎🌘
- अमित अरुण


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