शनिवार, 28 मार्च 2026

तेरी क़ब्र को अब मैं ,कच्चा ही रखूँगा


एक जरा सी बात पर,रोना आ गया 
मुझको याद,साथ तेरा,होना आ गया 

जाता न था कोई उस वीरान हिस्से में 
काम घर का आज वो,कोना आ गया 

इश्क़ सचमुच तार देता है जीते-जी 
जो था हासिल,उसको भी खोना आ गया 

तू नहीं,पर तुझसे ही बातें करता हूँ 
मुझको भी अब देख,जादू-टोना,आ गया 

बिन तेरे नींद मुझको आती ही नहीं थी 
अब गम के बिस्तर पर,सोना आ गया 

तेरी क़ब्र को अब मैं ,कच्चा ही रखूँगा
फूल खिलाने आ गए,दुःख बोना आ गया

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