एक जरा सी बात पर,रोना आ गया
मुझको याद,साथ तेरा,होना आ गया
जाता न था कोई उस वीरान हिस्से में
काम घर का आज वो,कोना आ गया
इश्क़ सचमुच तार देता है जीते-जी
जो था हासिल,उसको भी खोना आ गया
तू नहीं,पर तुझसे ही बातें करता हूँ
मुझको भी अब देख,जादू-टोना,आ गया
बिन तेरे नींद मुझको आती ही नहीं थी
अब गम के बिस्तर पर,सोना आ गया
तेरी क़ब्र को अब मैं ,कच्चा ही रखूँगा
फूल खिलाने आ गए,दुःख बोना आ गया
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