शनिवार, 28 मार्च 2026
आओ.. बातें करें... तुम्हे "जौन" का वासता
वो जो एक लड़की थी,कहती थी बार - बार
बस नाम मेरा यूँ ही, लेती थी बार -बार
चाहती थी बेतहाशा,मुझमें खो जाती थी
लड़ती-झगड़ती थी, फिर सो जाती थी
मैं ही बे-मुरव्वत खुद में ही रहता था
कितनी झूठी - मुठी उससे बातें कहता था
बस बर्दाश्त वो मुझको करती जाती थी
गुस्सा लेकिन नहीं जताती थी...
उसकी बातें बेमिसाल..
उसकी सोहबत कमाल...
वो समर्पण की मूरत...
मैं मतलब का जाल !
वो भक्ति का सागर...
मैं धोखे की गागर...
वो सपना सुहाना...
मैं बस एक बहाना...
वो शहद सी मीठी...
मैं जलती अंगीठी...
वो मीरा का भजन...
मैं बेवफ़ा सजन...
कितने दुःख दिए उसको...
क्यों बात नहीं की?
एक छत के नीचे
मुलाक़ात नहीं की.
कमाता रहा
जोड़ा तिनका-तिनका...
पर...
कमाया हुआ काम आता नहीं
बीत जता है जो...
वक़्त आता नहीं...
इसलिए..
बात एक जानना है ज़रूरी...
वक़्त को यादों में...
बाँधना है ज़रूरी...
कुछ नहीं रह जाता
बातें रह जाती है
बीत जता है वक़्त
यादें रह जाती है...
इसको कहता था "जौन"
कालजयी हादसा...
दिल के बोझ को हल्का
करने का रास्ता...
क्या हुआ जो बात नहीं कही गई....
क्या हुआ जो बात नहीं सुनी गई....
आओ अब...
दिल कि गिरहें खोले...
कुछ तुम बोलों...
कुछ हम बोलें...
और मिटा दें..
सदियों का हादसा...
आओ..
बातें करें...
तुम्हे "जौन" का वासता
आओ..
बातें करें...
तुम्हे "जौन" का वासता 🙏
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