शनिवार, 28 मार्च 2026

रात के दावे सबके सब झूठे निकले


तुम मुझको बचपन-सी प्यारी लगती हो 
तुम तो मुझको राजकुमारी लगती हो 

मैं तो झुलसा जंगल दावानल में 
तुम बिलकुल फूलों की क्यारी लगती हो 

मन तो मेरा है कि राधा बन जाऊँ 
तुम तो मुझको रास - बिहारी लगती हो 

इस दुनिया से हारा तो क्या हारा मैं?
तुम तो हमको जीत हमारी लगती हो 

कहा किसी राजा ने गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त
पर तुम तो हमको जन्नत सारी लगती हो

पता नहीं किसने औरत को अबला लिखा 
तुम तो सौ मर्दों पर भारी लगती हो 

क्रॉप टॉप के लटके झटके फीके है 
तुम जो साड़ी में इंडियन नारी लगती हो 

रात के दावे सबके सब झूठे निकले 
मैंने देखा चाँद से प्यारी लगती हो

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