अड़ जाऊँगा लड़ जाऊँगा खुद ही आगे बढ़ जाऊँगा तुमने क्या समझा है मुझको बन्दर घुड़की ड़र जाऊँगा मेरा "बाप" है मेरे अंदर परबत सारे चढ़ जाऊँगा...मेरी मौत पे तुम शर्मिंदा...ऐसी तोहमत मढ़ जाऊँगा...
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