जब से तुमने आना-जाना छोड़ दिया,
हमने तब से चाय बनाना छोड़ दिया।
इश्क़ में कैसे मिटते हैं, तुम क्या जानो,
हमने ख़ुद का साथ निभाना छोड़ दिया।
मेरे फ़ेमिनिज़्म की इंतिहा देखो,
करवा चौथ पे खाना-वाना छोड़ दिया।
हमको तो ख़ुद्दारी इतनी प्यारी थी,
काँसा रख के एक ख़ज़ाना छोड़ दिया।
शोहरत तो हिस्से में हमारे आई थी,
ठोकर पे रख के वो ज़माना छोड़ दिया।
उसके सारे वादे तो बस वादे थे,
उसने भी अब साथ निभाना छोड़ दिया।
इंसाँ की झूठी हरकत से हैराँ हो,
उसने भी धरती पे आना छोड़ दिया।
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