मैं एक घर बनाऊँगा...
जहाँ होगा मेरी बिटिया का एक कमरा...
जहाँ होंगी मेज़ पर किताबें उसकी...
पन्नों पर सिमटे उसके ख़याल होंगे...
समाज पर उँगली उठाते सवाल होंगे....
होगा एक कोना उसके गहनों का...
एल्बम होगा सारे भाई-बहनों का...
उस कमरे में उसकी...
सारी यादें सँजोई जाएँगी...
शादी के बाद वो...
जब भी घर को आएगी!!
भाइयों को दी जाएगी सख़्त ताकीद...
भाभी कमरे पर हक़ नहीं जताएगी...
मेरी बेटी हमेशा मेरी बेटी रहेगी..
उसका जब मन होगा लौटकर आएगी...
हम सब अब ये कहना बंद करें....
बेटा, तेरी डोली उठेगी तो बस...
अर्थी आएगी !!
मेरी बेटी हमेशा मेरी बेटी रहेगी..
उसका जब मन होगा लौटकर आएगी !!
रविवार, 20 सितंबर 2026
मेरी बेटी हमेशा मेरी बेटी रहेगी..
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