उन घाटियों की नाफ़-ए-जमीं की ओर
सरकती हुई जल की रेखा...
ढ़लकती हुई पानी की बूँद...
मानो भर रहा है प्याला धीरे-धीरे !
अब बनेगा भँवर...
बिन समंदर...
तेरी नाभि के घुमाव
बूँदों के बहाव
आह ! ये घाव !
बाम्बी का जुड़ाव
ममता की छाँव
जीवन का बहाव
गर्भ की नाल
तेरा कमाल...
फिर एक सवाल
बाम्बी नागन
या बाम्बी जीवन !!!
शनिवार, 29 मई 2021
बाम्बी नागन
वो राम थे जो रावण को समझाते रहे
कौन कहता है के तुझसे प्यार नहीं करते
वो बात और है के इज़हार नहीं करते
I love you कहना वो भी फेसबुक पर
हम कभी प्यार को इश्तहार नहीं करते
देखी थी तेरी तस्वीर एक दिन इंस्टा पर
बस तब से तस्वीरों पे ऐतबार नहीं करते
व्हाट्सप्प वाली चैट तेरी संभाल रखी है
अतरंगी बातों को अख़बार नहीं करते
ये इश्क़ है,इसको छुपाकर रखो प्यारे
मोहब्बत को ऐसे बाज़ार नहीं करते
मेरा शोना,मेरा बाबू,अरे आदमी है वो
ऐसे तो हम कुत्तों से भी प्यार नहीं करते
धीरे-धीरे सब अमीरों को सौंप देना
गरीबों को ऐसे लाचार नहीं करते
दुश्मन के खानदान से दुश्मनी निभाना
काम ऐसा कभी दिलदार नहीं करते
वो राम थे जो रावण को समझाते रहे
यहाँ दोस्त भी दोस्त को खबरदार नहीं करते
सच कहूँ यार तुम बोलते तो बहोत हो
पर बात कभी भी असरदार नहीं करते
माना के मैं समय पर नहीं आता
पर तुम भी तो मेरा इंतजार नहीं करते
मुस्कान,आँखें,अदाएँ,लहज़ा
यार ऐसे निहत्थों पे वार नहीं करते
तेरे होते अपना हर दिन त्यौहार था
अब त्यौहार पे भी त्यौहार नहीं करते
कितना लूटा इन जंगलों को हमने
अब्र अब यहाँ बौछार नहीं करते
धीरे-धीरे नदी का दम घोंट ड़ाला
अब पनघट पे घुंगरू झंकार नहीं करते
चूड़ियाँ भी टूट जाती है
सावन बीत जाता है,मेहंदी छूट जाती है
महबूबा जवानों की अक्सर रूठ जाती है
मोहब्बत सरहदों पर कुछ इस क़दर निभाते है
गाँव आते - आते चूड़ियाँ भी टूट जाती है
जजों को सांसदी,क्रिकेटरों को भारत रत्न
मुफलिसी यहाँ कुनबा सारा लूट जाती है
सिर्फ अच्छे जुमलों से पेट भरता नहीं साहब
चला जाए अगर बच्चा तो किस्मत फूट जाती है
उसने सफ़ेद साड़ी पहनी है आज
यहाँ अँधेरा भी रौशनी है आज
उसने सफ़ेद साड़ी पहनी है आज
उसे छूकर के जल उठूँगा
बाती दिये की खिल उठी है आज
उसका मिज़ाज़ सबसे मिलता नहीं
पर चिट्ठी उसने मुझको लिखी है आज
मैं उसके माथे को चूमना चाहता था
माँग इसलिए उसने सूनी रखी है आज
बच्चों की कसम खाकर बोल रही थी
मोहब्बत मुझसे ही वो करती है आज
मायके से होते वक़्त बिदा,मेरे लिए
उसकी आँखें छलक रही है आज
मैं अब भी उसको भगाने तैयार हूँ
लेकिन उसमें भारतीय नारी बची है आज
जात की बलिवेदी पर प्यार को न मारो
आप लोगों से यही बात कहनी है आज
यहाँ अँधेरा भी रौशनी है आज
उसने सफ़ेद साड़ी पहनी है आज
सदियाँ कतार में
सर झुकाए यहाँ खड़ी है सदियाँ कतार में
कोई अंतर नहीं आया मानव के व्यवहार में
झूठ का शिखर ऊँचा,सच गर्त में डूबा
उसने मन का सुख ढूंढा,दूसरों की हार में
"राष्ट्रवाद" का ये कैसा नंगा नाच है यहाँ
देशद्रोही है वो जो,अलग है विचार में
बेटियों की लाशें जलाकर सत्ता सुख को भोगते
अट्टाहस दबा नहीं,पीड़ा में,चित्कार में
लोकतंत्र,वोटतंत्र में बदलकर रह गया
शेष रह गयी जनता अब तो सिर्फ़ दुत्कार में
आँकडे
हम केवल "आँकड़ें" है...
कभी जनसंख्या के
कभी धर्म के
कभी चुनाव के
कभी "मौत" के!
हम "भीड़" है बस
उनकी नज़र में
जिन्हें हम रहनुमा
समझते है...
और... लड़ते है
अपनों से उनके लिए
जो हमें बस "आँकड़ा"
समझते है!
वो हँसते होंगे
हमारी बेवकूफी पर
जब बतियाते होंगे
आपस में!
ये हमें आँकड़ा बनाते है
फिर आँकड़ो से ही
हमें मूर्ख भी बनाते है!
जब पीठ थपथपानी हो
खुद की,
तब आँकड़ा दिखाते है
जब नाकामी छुपानी हो
तो आँकडे मिटाते है!
कुछ आँकडे ऐसे ही नादान
तैरकर ऊपर आ गए...
नदियों में तैरते आँकडे
दफ़न सच दिखा गए!
आँकडे तैरकर ऊपर आ गए!
Positivity
सोचता हूँ....
जब पहला कदम
बढ़ाया होगा प्रभु राम ने
वनवास का
राजा दशरथ क्या positive
सोच रहें होंगे?
क्या वो नहीं जानते होंगे
महिमा राम की
या के नहीं जानते होंगे
विधि के विधान को
क्या देख नहीं पाए होंगे
भविष्य का वो काल
जो उनके बेटे को
मानव से भगवान बनाने वाला था!
क्या जान नहीं पाए
राजा दशरथ कि
इसी वनवास के
बैकड्राप में
रामायण रची जानेवाली है!
क्या देख नहीं पाए
राजा दशरथ...
उस अमर विजय को
जिसने उनके राम को
मर्यादा पुरषोत्तम बना दिया!
क्यों राजा दशरथ...
इतनी सारी positive
बातों को छोड़कर
पुत्र वियोग में
रोते - रोते
त्याग गए प्राण!
मूर्ख थे राजा दशरथ
उन्हें सीखना चाहिए था
आज के गोदी मिडिया से
कैसे सत्ता के तलवे चाटने की
अंधी दौड़ में...
लाशों के अंबार में
Positivity ढूंढी जाती है
कैसे आँसूओं को अनदेखा कर
आँकड़ो की जादूगरी की जाती है!
कैसे भूख को मुफ्तखोरी से
जोड़ा जाता है
कैसे भाईचारे को तोड़ा जाता है!
और.... इतना सब करके भी
Positive रहा जा सकता है!
जिनके अपने चले गए
उन्हें न रोने को कहा जा सकता है!
ये रोतलू लोग
सत्ता की चमक को
अपने आँसूओं की
Negativity फीका न कर दें
इससे पहले इन्हे
Positivity की घुट्टी पिलाओ!
राजा दशरथ तुम
राम के जाने का
और देश के लोगों
तुम अपनों के
खो जाने का
वियोग न मनाओ!
सत्ता को जरूरत है positivity की
चाहे लाशों के ढेर पर खड़े होकर ही सही
Positivity फैलाओं....
मूर्खों अपनों के मरने पर आँसू मत बहाओ!
मूर्खों अपनों के मरने पर आँसू मत बहाओ!