शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

शब्दहीन है 'प्रेम' परिभाषा !!!



प्यार की है अपनी ही भाषा
आखें छलकायें अभिलाषा

चुप-चुप रहना;कुछ-कुछ कहना
कहो न कुछ भी;जगती-आशा

कहें न कहें ? रूठ गयी तो ...
इतना सोचा;छाई निराशा

होठ मौन है;आँख मुखर है
शब्दहीन है 'प्रेम' परिभाषा

धरती, अम्बर, चाँद, सितारे !!



धरती, अम्बर, चाँद, सितारे
इक तू जीती , ये सब हारे

नदिया,झरने,परबत,जंगल
तेरे आगे , फीके सारे

आसूँ-मोती,आँखें-सीपी
सारी बातें तेरे सहारे

लड़ना-झगड़ना,रूठना-रोना
प्यार के दुःख है कितने प्यारे

जीना-मरना, पाना- खोना
प्यार दिखाए कैसे नज़ारे

बादल, बूंदें, बारिश, खुशियाँ
तेरे बिन गुमसुम है सारे

प्रेम-समर्पण, भक्ति-शक्ति
प्यार में तेरे कितने इशारे

गम-ख़ुशी, आसूँ-मुस्कान
सरे परिवर्तन तेरे सहारे

इस बिस्तर का दिल धडकने लगा है !!!



इस बिस्तर का दिल धडकने लगा है , तेरी कुछ सिलवटें इसमें बाकी है
लगता है अभी अंगड़ाई लेके खुशनुमा हो जायेंगा, तेरी कुछ करवटें इसमें बाकी है

लोग कहते है , मै मर गया, सांस रुक गयी, जी थम गया
कमबख्त जानते नहीं , तू दिल में है, तेरी कुछ आहटें इसमें बाकी है

सारा चमन उजड़ा , सुखी कलियाँ , फूलों ने दम तोड़ दिया
तूने छुआ था वो फूल जिन्दा है, तेरी कुछ मुस्कुराहटें इसमें बाकी है

मंदिर, मस्जिद , गुरूद्वारे सब बेजान इमारते थी पत्थर की ढह गयी
मेरा दिल आबाद है अब भी , तेरी कुछ बनावटे इसमें बाकी है

आसमान की गोद हुई सूनी , कुछ बादल रूठे, कुछ छुटे
मेरे दिल में घटाएँ अब भी उठती है , तेरी कुछ लटें इनमे बाकी है

कह दो प्रिये , मुझपर तुम्हे विश्वास है ना !!!




सबने मेरी क्षमताओं को कमतर है  माना
जानता   हूँ  मैं  क्या  है  मेरा      ठिकाना
थोडा     ऊँचा     उड़ने की ये प्यास है ना
कह दो प्रिये , मुझपर तुम्हे विश्वास है ना


चाहता    हूँ     मैं   तुम्हारा  साथ  हरदम
चाहता हूँ लिखूं शोलों पे दास्ताने  शबनम  
कितनी  असंभव-सी ये  मेरी आस है  ना
कह दो प्रिये , मुझपर तुम्हे विश्वास है ना


अपने लिए जी कर करे जीवन को छोटा
मुश्किल   है मेरे   लिए  ऐसा  समझौता
तुम   कहो  सच्चा मेरा  अहसास  है  ना
कह दो प्रिये , मुझपर तुम्हे विश्वास है ना


तुम  धरा  पर  आई  सिर्फ  मेरे लिए हो
क्या फर्क जो न संग हमने फेरे लिए हो
अपना  ये  रिश्ता   कुछ  तो  ख़ास  है ना
कह दो प्रिये , मुझपर तुम्हे विश्वास है ना

मित्र !!



गुलाब,कस्तूरी,लोबान, इत्र - क्या है तू ?
खुशबू का बदन लिये, मेरी मित्र - क्या है तू ?

तुझे देखकर आँखें पाकीजा हो जाती है
गंगा, यमुना या आकाशगंगा पवित्र - क्या है तू ?

तेरे होने से क्यों ख़ुशी सी महसूस करता हूँ
उज्वल,खुशनुमा, अनसुलझा चरित्र - क्या है तू ?

तेरी इक तस्वीर में सारे रंग कुदरत के
खुदा के कैनवास पर बना चित्र - क्या है तू ?

विनम्र , करुणामयी, ममता की मूरत
इन्सान है या संत , ऐ सतचरित्र - क्या है तू ?

मिल गई जन्नत तुझसे मोहब्बत !!!



मिल गई जन्नत तुझसे मोहब्बत

मिल गई जन्नत तुझसे मोहब्बत
सबसे अच्छी तेरी सोहबत

तेरी हँसी का - हल्का इशारा
धुल गए सब गम , खुल गई किस्मत

तेरे आसूँ बोझल - बोझल
तेरी खुशियाँ खुदा की नेमत

पलके झुकाना , पलके उठाना
प्यार भरी है तेरी हरकत

याद तुझे करता हूँ हरपल
तू भी करना मिले जो फुर्सत

यद् तुम्हारी धक् धक् धडके
प्रेमरोग ये कैसी आदत

तेरे संग अब सबकुछ पाया
तेरे आगे फीकी जन्नत

तुझे जो देखा मिल गई तृप्ती
बची न दिल में कोई हसरत

कुछ भी नहीं!!!



दिल की बातें दिल में रह गयी , जुबाँ पे आया कुछ भी नहीं
सोचा बहुत था, पर आई जब तुम, हमने बताया कुछ भी नहीं

कभी ये मोती, कभी ये शबनम , तुम्हारा कतरा गंगाजल नम
गम तो यहाँ भी दबे बहुत थे, हमने बहाया कुछ भी नहीं

बादल, बिजली, सूरज , चंदा, तारें, मौसम सब तुम हो
जो कुछ था सब तुमपे लुटाया, हमने बचाया कुछ भी नहीं

दुःख सब मेरे, सुख सब तेरे, हम है तेरे गम के लुटेरे
दर्द की वैसे खेती की है, तुझे भिजवाया कुछ भी नहीं

चंचल आँखें, नाजुक बातें , चाँद सा चेहरा , जुल्फें रातें
एक झलक में इतना सब कुछ, अभी दिखाया कुछ भी नहीं

बदन धूप का, खिले रूप का, फूल-सी खुशबू , अल्ला हू
सारी नेमत तेरे हिस्से , हमने पाया कुछ भी नहीं

तेरा पसीना ओस की बूंदें , आसूं तेरे गौहर हैं
हम जो हँसें तो बने गुनाह, तूने जो रुलाया कुछ भी नहीं 

पता हैं तूने पिया न पानी, चाँद जो तुझको दिखा नहीं
मैंने भी है साथ निभाया , सुबह से खाया कुछ भी नहीं

मेरी बरकत, मेरी शोहरत, सब तुझसे ही रोशन हैं
जो कुछ है सब तेरा है, मेरा कमाया कुछ भी नहीं